रिसर्च पेपर · RP24
30 सेकंड में स्ट्रेस कम: g = 0.72
ऑपर्वर-स्टैंस यानी खुद को खयाल से थोड़ा दूर रखना। आप खयाल बनते नहीं। आप खयाल देखते हैं। चार साफ RCT (ऐसी स्टडी जिसमें लोगों को लॉटरी की तरह दो ग्रुप में बांटा जाता है) में यह देखा गया। ये स्टडी गैर-क्लिनिकल वयस्कों पर थीं। कुल N = 313। छोटे डिसेंटिरिंग या डिफ्यूजन रेप्स ने तुरंत स्ट्रेस घटाया। Hedges g (असर कितना बड़ा है, इसका नाप) = 0.72। 95% CI 0.32 to 1.12। I² = 62%। 95% prediction interval −0.48 to 1.91। तुलना निष्क्रिय, शैम या वेटलिस्ट ग्रुप से थी। यह मध्यम असर है। असर मिनटों में आता है। कभी-कभी सेकंडों में। पुरानी लैब स्टडी में डिफ्यूजन बनाम कुछ न करना: g = 0.74। बाद की समीक्षा में सेल्फ-डिस्टेंस्ड बनाम अंदर से सोचना: g = 0.19। किससे तुलना की, इससे नंबर बदल जाता है। सबसे साफ नतीजा स्पीड का है। शब्द दोहराने वाली स्टडी में बेचैनी 3 से 10 सेकंड में नीचे आ गई। खयाल पर यकीन घटने में 20 से 30 सेकंड लगे। ज्यादातर लैब प्रोटोकॉल 5 से 15 मिनट के थे। एक घंटे का कंप्यूटर सेशन, फिर रोज इस्तेमाल। कमजोर वयस्कों में 10 दिन तक उलझन और नकारात्मक भाव कम रहे। टिकाऊपन पतला है। उदास याद को दूर से देखने पर 1 दिन और 7 दिन बाद भी राहत बनी। उसी समय दिया गया डिस्ट्रैक्शन काम बाद में उड़ गया। तीन सेशन वाली आवाज वाली स्टडी (n = 22) में फायदा 1 महीने तक रहा। 3 और 6 महीने पर ऑब्जर्वर-स्टैंस और रिलैक्सेशन दोनों, कुछ न सिखाने से बेहतर रहे। दोनों एक्टिव प्रैक्टिस एक-दूसरे से अलग नहीं पड़े। GRADE यकीन तुरंत स्ट्रेस पर Low है। टिकाऊपन और भारत के ऑफिस वाले वयस्कों पर Very Low है। CTRI पर भारत की ऐसी कोई रजिस्टर्ड RCT नहीं मिली। गैर-क्लिनिकल वयस्कों पर छपी भारतीय RCT भी शून्य है। यह नंबर ऑफिस के लिए शुरुआत का अंदाजा है। स्थानीय गारंटी नहीं। ईमानदार अनुवाद है रोज गिने जा सकने वाले रेप्स। एक कोर्स नहीं।