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ऑफिस में ग्रोथ माइंडसेट: असर d = 0.02, भारत में स्टडी 0

ग्रोथ माइंडसेट (Growth Mindset) प्रोग्राम नौकरी वाले बड़ों से कहते हैं: काबिलियत कोई फिक्स्ड रैंक नहीं है। क्वालिटी के हिसाब से देखा जाए तो ऑफिस वाली स्टडीज में परफॉर्मेंस और खुशहाली पर असर छोटा या लगभग शून्य है। यही बैंड Macnamara and Burgoyne के अच्छे स्टूडेंट आंकड़े d = 0.02 का है। यह PRISMA-2020 सिस्टेमैटिक रिव्यू है। सवाल यह था: ग्रोथ माइंडसेट प्रोग्राम ऑफिस में सीखने, खुशहाली और काम के नतीजे पर क्या करते हैं। सर्च सितंबर 2026 में हुई। स्रोत: PubMed, PsycINFO, Scopus, Web of Science, Google Scholar, CTRI, ClinicalTrials.gov और OSF preprints। साल: 2007 से 2026। योग्य डिजाइन: RCT (ऐसी स्टडी जिसमें लोगों को लॉटरी की तरह दो ग्रुप में बांटा जाता है) या कंट्रोल्ड ट्रायल। लोग: नौकरी वाले या स्किल ट्रेनिंग वाले बड़े। चार पब्लिश रिपोर्ट्स में पांच सैंपल मिले। कहानी की तरह मिलाकर लिखा गया। पक्की मेटा-एनालिसिस नहीं हो सकी। साफ तुलना वाली स्वतंत्र स्टडी पांच से कम थीं। दोहरने वाला सिग्नल सिर्फ यकीन का था। दो पूर्वी एशिया कर्मचारी सैंपल में ग्रोथ माइंडसेट स्कोर तुरंत बढ़ा, करीब g = 0.47 से 0.50। Hedges g असर कितना बड़ा है, इसका नाप है। जॉब संतुष्टि, फलना-फूलना और रेटेड परफॉर्मेंस अक्सर शून्य रहे। असर वहीं दिखा जहां खुद और जॉब दोनों को बदलने योग्य माना गया। अकेला नारा ‘not yet’ टिकाऊ नतीजा नहीं दिया। भारत में कोई योग्य ट्रायल नहीं चला। भारतीय ऑफिस प्रोग्राम शब्द ‘yet’ को पहला रेप (rep) माने, नतीजा नहीं। यकीन के साथ एक स्किल जोड़ें। एक जॉब-क्राफ्टिंग प्लान दें। गिने जा सकने वाले रेप्स रखें। यकीन बदलने पर सबूत कमजोर है। परफॉर्मेंस और खुशहाली पर बहुत कमजोर है।

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