रिसर्च पेपर · RP41

भारत में सिर्फ 7 स्टडी, असर g = 0.89

भारतीय ऑफ़िस वेलबीइंग प्रोग्राम खरीदते हैं। जल्दी। उम्मीद के साथ। अक्सर बिना RCT के। 2000 से 2026 तक 7 भारतीय RCT मिलीं। नॉन-क्लिनिकल इमोशनल फ़िटनेस (Emotional Fitness) पर। 4 स्टडी का पूल बन सका। Random-effects Hedges g = 0.89 (95% CI 0.62 to 1.16)। Hedges g असर कितना बड़ा है, इसका नाप है। यहां स्ट्रेस या वेलबीइंग पर। स्टडी के बीच फर्क कम है। I² = 20%। τ² = 0.016। 95% prediction interval 0.52 to 1.26। यकीन कम है। हर स्टडी खुली थी। ज्यादातर में कंट्रोल सिर्फ इंतज़ार था। 7 में से 5 स्टडी योग या सांस की थीं। एक स्टडी कैरेक्टर-स्ट्रेंथ कोचिंग की थी। g = 0.54। वर्किंग एडल्ट पर माइंडफुलनेस-ओन्ली की RCT शून्य। ग्रैटिट्यूड की शून्य। व्हाट्सऐप-फर्स्ट या AI-कोच की पूरी वर्कर RCT भी शून्य। एक ही स्टडी हिंदी में चली। रेज़िलिएंस मुख्य नतीजा लगभग खाली है। Pandya और साथी (2022) ने 30 रिकॉर्ड देखे। RCT लगभग नहीं मिलीं। Sohal और Sharma (2025) ने 38 पेपर देखे। असर का पूल फिर भी नहीं बना। सवाल सादा है। कितनी RCT? पूल कितना? गैप कहाँ? लोग: भारत के वयस्क। नॉन-क्लिनिकल। प्रोग्राम: योग, सांस, कोचिंग जैसे तरीके। नतीजा: वेलबीइंग, स्ट्रेस, रेज़िलिएंस। साल: 2000–2026। सर्च: PubMed, Google Scholar, Scopus, CTRI, ClinicalTrials.gov, OSF। नंबर शून्य नहीं। सात है। यह पायलट बैच है, पूरा प्रोडक्शन नहीं।

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