रिसर्च पेपर · RP19

Stress-Is-Enhancing, Pooled

छोटी स्ट्रेस-माइंडसेट प्रैक्टिस एक सोच बदलने की कोशिश करती है। सोच यह है कि स्ट्रेस सिर्फ़ नुकसान नहीं करता। स्ट्रेस काम, सेहत और सीखने में मदद भी कर सकता है। सात RCT (ऐसी स्टडी जिसमें लोगों को लॉटरी की तरह दो ग्रुप में बांटा जाता है) में नतीजा साफ़ है। स्ट्रेस माइंडसेट पर करीबी असर Hedges g (असर कितना बड़ा है, इसका नाप) = 0.66 रहा। 95% CI 0.39 से 0.94 है। I² = 80% है। 95% prediction interval −0.20 से 1.53 है। औसत असर मध्यम है। Prediction interval शून्य के पार जाता है। यही ईमानदार सुर्खी है। तीन मिनट की वीडियो आज स्कोर हिला देती है। चार हफ़्ते में फायदा अक्सर जाता रहता है। मेटाकॉग्निटिव सेशन, इमेजरी और रोज़ लिखने वाले रेप्स ज़्यादा देर टिकते हैं। आगे के नतीजे छोटे और डगमग हैं। पहले की एक परफ़ॉर्मेंस मेटा-एनालिसिस में अकेले इस तरीके का d = 0.18 था। 95% CI −0.15 से 0.51 था। k = 6 था। यह आँकड़ा मज़बूत नहीं था। लक्षण और सेहत के नतीजे बँटे हुए हैं। कुछ कर्मचारी और स्टूडेंट स्टडी में शिकायतें कम दिखीं। दो जर्मन-भाषी वयस्क स्टडी में सोच फीकी पड़ी। फिर सेहत नहीं सुधरी। शरीर के टेस्ट बहुत कम हैं। उन्हें जोड़कर औसत नहीं निकाला गया। CTRI, ClinicalTrials.gov और किताबों की सूची में भारत की कोई लायक स्टडी नहीं मिली। भारतीय प्रोफ़ेशनल्स के लिए मतलब सीधा है। तरीक़ा सस्ता है। छोटा है। रोज़ के रेप की तरह सिखाया जा सकता है। यह जादू नहीं है। दोहराव के बिना सोच खिसक जाती है। दोहराव के साथ, और एक कोच के साथ, यह ऑफ़िस प्रोग्राम का ठीक टुकड़ा है। कोच स्ट्रेस को सिर्फ़ धूप न बताए। तुरंत सोच बदलने पर भरोसा मध्यम है। टिकने, लक्षण, परफ़ॉर्मेंस और शरीर के टेस्ट पर भरोसा कम है।

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