रिसर्च पेपर · RP46
ऑफिस रेजिलिएंस: काम में फायदा 0.36, महीने बाद 0.03
Vanhove और साथियों ने 2016 में एक छोटी बात कही। ऑफिस रेजिलिएंस प्रोग्राम का असर छोटा था। एक महीने बाद वह असर और छोटा हो गया। यह अपडेट एक सीधा सवाल पूछता है। बिजनेस नतीजे और नई स्टडी जोड़ें, तो बजट का क्या केस है? परफॉर्मेंस और टर्नओवर इंटेंशन पर नई रैंडम-इफेक्ट्स मेटा-एनालिसिस अभी मुमकिन नहीं है। 2010 से 2026 तक पांच योग्य RCT या कंट्रोल्ड ट्रायल नहीं मिले। जिनसे इन दो नतीजों का गिनती वाला असर निकाला जा सके। आखिरी बड़ी पूल अब भी Vanhove et al. (2016) है। परफॉर्मेंस d = 0.36 पास के समय में। एक महीने बाद d = 0.03। टर्नओवर इंटेंशन पर दो नई स्टडी हैं। सिर्फ एक में तीन महीने बाद छोटी गिरावट मिली। रेजिलिएंस स्केल पर सबूत ज्यादा मजबूत है। Joyce et al. (2018) ने ग्यारह RCT जोड़ीं। SMD = 0.44 (95% CI 0.23 to 0.64)। SMD का मतलब: असर कितना बड़ा है, इसका नाप। नई ऑफिस स्टडी का दायरा चौड़ा है। Wild et al. (2020, n = 430) में असर शून्य रहा। छोटी टारगेटेड स्टडी में असर बड़ा दिखा। सबके लिए एक बार का प्रोग्राम जल्द मुरझाता है। टारगेटेड प्रैक्टिस और फॉलो-अप वाला प्रोग्राम टिकता है। कभी बढ़ता भी है। इसलिए बजट का केस शर्तों वाला है। शुक्रवार को नापा गया वर्कशॉप, अप्रैजल तक भूल जाए, तो पैसा नहीं लौटता। रोज़ गिने जा सकने वाले रेप्स (reps), कोच की मदद, और तीन महीने का फॉलो-अप रेजिलिएंस हिला सकते हैं। कुछ स्टडी में छोड़ने का इरादा भी। भारतीय कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स पर रिसर्च लगभग नहीं है। एक योग्य भारतीय ऑफिस RCT मिली। वह महिला पुलिस अफसरों पर थी। IT या सर्विस स्टाफ पर नहीं। पक्केपन का स्तर: रेजिलिएंस पर मध्यम। परफॉर्मेंस पर कम। टर्नओवर पर बहुत कम। खाली नतीजा भी छप सकता है। यह नतीजा खाली नहीं है। यह छोटा है। समय-सीमित है। और एक जैसा नहीं है।